
युवा शिविर
युवा शिविर
तिथि और स्थान जल्द अपडेट होंगे।
अपने भीतर लौटने, सजग जीवन जीने और शरीर, विचार, भाव तथा चेतना को समझने की एक व्यावहारिक यात्रा।

पूज्य परम आनन्द जी
अगला शिविर
१–८ नवंबर २०२६
सामुदायिक भवन, मालवीय नगर, जयपुर
नियमित मार्गदर्शन और सत्संग के लिए हर दिन इसी Zoom लिंक का उपयोग करें।
ऊर्जा, स्पष्टता, उल्लास और भीतर की स्थिरता के लिए चार जुड़ी हुई दिशाएँ।
शिविर कैलेंडर
पुष्ट शिविर की जानकारी स्पष्ट रूप से दिखाई गई है। अपुष्ट कार्यक्रमों को जल्द अपडेट के रूप में चिह्नित किया गया है।

युवा शिविर
तिथि और स्थान जल्द अपडेट होंगे।

चेतना जागृति शिविर
तिथि और स्थान जल्द अपडेट होंगे।

चेतना जागृति शिविर
तिथि और स्थान जल्द अपडेट होंगे।
हाल में सम्पन्न शिविरों की एक झलक। तिथियाँ फाउंडेशन की साझा की गई सामग्री से ली गई हैं।
५–१२ अप्रैल २०२६
चेतना जागृति शिविर
श्री गंगानगर · श्री माहेश्वरी भवन
१८–२८ मार्च २०२६
ध्यान शिविर
ऋषिकेश · श्री माँ कात्यायनी मंदिर
१०–२१ अक्टूबर २०२६
ध्यान शिविर
ऋषिकेश · ग़रीबदासीय आश्रम (अवधूत बाड़ा), शीशम की झाड़ी, मुनि की रेती

विधि
भोजन, विश्राम, गति और सजगता को ऐसी दिनचर्या में जोड़ना जिसे घर पर भी निभाया जा सके।
पूरी विधि पढ़ें“शरीर ही हमारा मंदिर है, इसे समझें और स्वस्थ रखें।”
पूज्य परम आनन्द जी
अब तक
फाउंडेशन
अनुभव
ये व्यक्तिगत अनुभव हैं। परिणाम हर व्यक्ति में भिन्न होते हैं।
सात दिन में सबसे बड़ा अंतर यह आया कि सुबह उठते ही भारीपन नहीं रहता। खाने का समय बदला, और नींद अपने आप सुधर गई।
सरल दिनचर्या ने मुझे दिखाया कि मेरे पास समय की कमी नहीं थी, प्राथमिकताओं की स्पष्टता कम थी। घर लौटकर काम और परिवार दोनों के लिए अधिक जगह बनी।
मौन के छोटे अंतराल मेरे लिए सबसे उपयोगी रहे। अब किसी कठिन बात का उत्तर देने से पहले कुछ क्षण रुकना स्वाभाविक होने लगा है।
भजन, सेवा और साथ बैठकर भोजन करने में जो सहज आनंद मिला, वही मेरे लिए शिविर की सबसे सुंदर स्मृति है।
सुबह की सहज गति, समय पर भोजन और जल्दी विश्राम का क्रम घर पर भी निभ सका। सबसे बड़ा लाभ यह था कि दिन बिखरा हुआ नहीं लगा।
आश्रम में गंगा किनारे के सात दिन — मौन, प्राणायाम और सादा भोजन। मन का बोझ भी उतरा।
संस्थापक

पूज्य परम आनन्द जी चार दशकों से भोजन, दिनचर्या और सजगता के माध्यम से शरीर के साथ सहयोग करने की बात कह रहे हैं। उनका मार्गदर्शन छोटे, नियमित और व्यावहारिक बदलावों पर केंद्रित है।
उनका शिविर केवल उपदेश नहीं देता। वह सात दिन तक एक दिनचर्या जीकर दिखाता है, ताकि लौटने के बाद व्यक्ति स्वयं उसे निभा सके।
शिविर का एक दिन
शिविर में आने से पहले सबसे बड़ा प्रश्न यही होता है: वहाँ होगा क्या? पूरा दिनक्रम यहाँ है।
शरीर की वर्तमान स्थिति समझना
शेष ४ दिन शिविर पृष्ठ पर
शंका समाधान
सहयोग
स्वैच्छिक योगदान सेवा, अध्ययन सामग्री और सामुदायिक कार्य में उपयोग होता है। यह लागू शिविर शुल्क से अलग है।
सुझाई गई राशि
वही राशि चुनें जो आपके लिए सहज हो। सहयोग पूर्णतः स्वैच्छिक है।
जानें सहयोग कहाँ लगता हैआपका सहयोग किसमें लगता है
ज्ञान

क्या खाना है इस पर हज़ार सलाहें मिलती हैं। कब खाना है, इस पर लगभग कोई नहीं बोलता — जबकि शरीर पर उसका असर अधिक है।
१८ अगस्त २०२६६ मिनट

उपवास परंपरा में भी है और शरीर-विज्ञान में भी। दोनों एक ही बात कहते हैं — पाचन तंत्र को अंतराल चाहिए।
३० जुलाई २०२६८ मिनट

पूज्य परम आनन्द जी के एक सत्संग से — शरीर के प्रति दृष्टि बदलने पर आहार अपने आप बदल जाता है।
१२ जुलाई २०२६५ मिनट
पंजीकरण या तिथि सम्बन्धी किसी भी प्रश्न के लिए हमें व्हाट्सएप कीजिए, या शिविर समूह से जुड़िए जहाँ नए शिविर की सूचना सबसे पहले आती है।
जब भी आपके नगर के निकट कोई शिविर घोषित हो, आपको सबसे पहले पता चले।