भोजन का समय — सबसे कम बोला जाने वाला नियम
क्या खाना है इस पर हज़ार सलाहें मिलती हैं। कब खाना है, इस पर लगभग कोई नहीं बोलता — जबकि शरीर पर उसका असर अधिक है।
१८ अगस्त २०२६६ मिनट

शरीर की अपनी घड़ी
पाचन रस अपने आप नहीं बनते — वे उस समय बनते हैं जिस समय शरीर को भोजन की अपेक्षा होती है। यदि भोजन का समय रोज़ बदलता रहे तो शरीर को कभी पता नहीं चलता कि तैयारी कब करनी है।
शिविर में सबसे पहले यही स्थिर किया जाता है। बहुत से लोगों में केवल समय स्थिर होने से ही गैस, भारीपन और नींद की शिकायत घटने लगती है — आहार बदलने से पहले ही।
रात का भोजन
यदि पूरे दिन में केवल एक परिवर्तन करना हो, तो वह यह है — रात्रि का भोजन सूर्यास्त के निकट और हल्का। सोने से तीन घंटे पहले।
यह एक नियम एक साथ तीन शिकायतों पर काम करता है: एसिडिटी, नींद और भार।

