
नवरात्रि साधना शिविर
- तिथि
- १०–२१ अक्टूबर २०२६
- स्थान
- ग़रीबदासीय आश्रम (अवधूत बाड़ा), शीशम की झाड़ी, मुनि की रेती, ऋषिकेश
सम्पन्न जीवन
Peace
शांति का अर्थ विचारों का पूरी तरह रुक जाना नहीं है। इसका अर्थ है विचारों, भावनाओं और परिस्थितियों के बीच अपने केंद्र से जुड़े रहने की क्षमता विकसित करना।
मौन, श्वास और ध्यान दिन की गति में छोटे विराम बनाते हैं। इन विरामों में प्रतिक्रिया और उत्तर के बीच का अंतर दिखाई देने लगता है।
शांति परिस्थितियों को नियंत्रित करने से नहीं, उनके बीच अपनी प्रतिक्रिया को समझने से गहरी होती है।
शिविर का वातावरण सहायक है, पर अभ्यास का वास्तविक स्थान घर और कार्यस्थल है। इसलिए सरल विधियाँ चुनी जाती हैं जिन्हें कुछ मिनटों में दोहराया जा सके।
नियमित अभ्यास शांति को केवल एक अनुभव नहीं रहने देता। वह निर्णय, संवाद और संबंधों की गुणवत्ता में दिखाई देने लगती है।
अनुभव
ये व्यक्तिगत अनुभव हैं। परिणाम हर व्यक्ति में भिन्न होते हैं।
मौन के छोटे अंतराल मेरे लिए सबसे उपयोगी रहे। अब किसी कठिन बात का उत्तर देने से पहले कुछ क्षण रुकना स्वाभाविक होने लगा है।
आश्रम में गंगा किनारे के सात दिन — मौन, प्राणायाम और सादा भोजन। मन का बोझ भी उतरा।
शिविर कैलेंडर
तिथि, नगर, स्थान और शेष स्थान, सब कुछ पहले से स्पष्ट। पोस्टर का इंतज़ार नहीं।




हाल में सम्पन्न शिविरों की एक झलक। तिथियाँ फाउंडेशन की साझा की गई सामग्री से ली गई हैं।
५–१२ अप्रैल २०२६
श्री गंगानगर · श्री माहेश्वरी भवन
१८–२८ मार्च २०२६
ऋषिकेश · श्री माँ कात्यायनी मंदिर
७–१७ मार्च २०२६
ऋषिकेश · ऋषिकेश
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ज्ञान

क्या खाना है इस पर हज़ार सलाहें मिलती हैं। कब खाना है, इस पर लगभग कोई नहीं बोलता — जबकि शरीर पर उसका असर अधिक है।
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शंका समाधान