६–१३ दिसंबर २०२६
आश्रम शिविर
ऋषिकेश · गंगा तट आश्रम४१ स्थान शेष
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शिविर
गंगा तट पर, हिमालय की तलहटी में — वही दिनचर्या, अलग परिवेश।
दिनचर्या वही रहती है — वही समय, वही आहार, वही उपवास। जो बदलता है वह है परिवेश। गंगा तट पर, पहाड़ों की तलहटी में, नगर का शोर और उसकी आदतें दोनों पीछे छूट जाती हैं।
आश्रम शिविर में स्थान सीमित रहते हैं, इसलिए यह प्रायः उन लोगों के लिए रखा जाता है जो पहले एक बार शिविर कर चुके हैं और अब गहराई में जाना चाहते हैं।
सुबह गंगा किनारे प्राणायाम, दिन में मौन का एक लंबा अंतराल, और संध्या को आरती — यह क्रम नगर के भवन में संभव नहीं होता।
६–१३ दिसंबर २०२६
ऋषिकेश · गंगा तट आश्रम४१ स्थान शेष
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