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पूज्य परम आनन्द जी मंच पर बैठकर श्रोताओं को संबोधित करते हुए

विधि

विधि

भोजन, दिनचर्या, साधना और व्यावहारिक मार्गदर्शन

शरीर शुद्धि • विचार शुद्धि • भाव शुद्धि

साधना के तीन परस्पर जुड़े मार्ग

कर्म, ज्ञान और भक्ति की साधना दैनिक जीवन में एक साथ आगे बढ़ती है।

  1. कर्मयोग

    सेवा, समर्पण और कुशल कर्म

  2. ज्ञानयोग

    स्व-चिन्तन, अध्ययन और आत्मबोध

  3. भक्तियोग

    प्रेम, समर्पण और भजन-साधना

पूज्य परम आनन्द जी प्रातःकाल छत पर ध्यानस्थ बैठे हुए

विधि

सरल और संतुलित दिनचर्या

भोजन, विश्राम, गति और सजगता को ऐसी दिनचर्या में जोड़ना जिसे घर पर भी निभाया जा सके।

“शरीर ही हमारा मंदिर है, इसे समझें और स्वस्थ रखें।”

पूज्य परम आनन्द जी
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