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परम आनन्द जी मंच पर बैठकर श्रोताओं को संबोधित करते हुए

विधि

विधि

बिना दवा के स्वस्थ होने की पद्धति

शरीर • विचार • भाव

साधना के तीन परस्पर जुड़े मार्ग

स्व-चिन्तन, भक्ति और सेवा — शिविर की साधना इन तीनों को दैनिक जीवन में साथ लाती है।

  1. 01

    ज्ञानयोग

    स्व-चिन्तन, अध्ययन और आत्मबोध

  2. 02

    भक्तियोग

    प्रेम, समर्पण और भजन-साधना

  3. 03

    कर्मयोग

    सेवा, समर्पण और कुशल कर्म

परम आनन्द जी प्रातःकाल छत पर ध्यानस्थ बैठे हुए

विधि

आहार ही औषधि है

शरीर स्वयं को ठीक करना जानता है। हमारा कार्य केवल इतना है कि हम उसमें बाधा डालना बंद करें — और उसे वह दें जिसकी उसे वास्तव में आवश्यकता है।

“शरीर ही हमारा मंदिर है, इसे समझें और स्वस्थ रखें।”

परम आनन्द जी
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