
विधि
विधि
भोजन, दिनचर्या, साधना और व्यावहारिक मार्गदर्शन
शरीर शुद्धि • विचार शुद्धि • भाव शुद्धि
साधना के तीन परस्पर जुड़े मार्ग
कर्म, ज्ञान और भक्ति की साधना दैनिक जीवन में एक साथ आगे बढ़ती है।
कर्मयोग
सेवा, समर्पण और कुशल कर्म
ज्ञानयोग
स्व-चिन्तन, अध्ययन और आत्मबोध
भक्तियोग
प्रेम, समर्पण और भजन-साधना
- आहार ही औषधि हैजो थाली में है वही सबसे पहले शरीर से बात करता है — दवा उसके बाद आती है।पूरा पढ़ें

- अपने डॉक्टर स्वयं बनेंअपने शरीर को पढ़ना सीखिए — कौन-सा भोजन क्या करता है, यह आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता।पूरा पढ़ें

- सजग आहारक्या खाना है इससे पहले यह तय होता है कि कब और कैसे खाना है।पूरा पढ़ें

- दिनचर्याशरीर लय पर चलता है। लय टूटती है तो सब कुछ टूटता है।पूरा पढ़ें

- उपवासउपवास भूखा रहना नहीं है — यह पाचन तंत्र को छुट्टी देना है।पूरा पढ़ें


विधि
सरल और संतुलित दिनचर्या
भोजन, विश्राम, गति और सजगता को ऐसी दिनचर्या में जोड़ना जिसे घर पर भी निभाया जा सके।
पूरी विधि पढ़ें“शरीर ही हमारा मंदिर है, इसे समझें और स्वस्थ रखें।”
पूज्य परम आनन्द जी
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