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रोग

एसिडिटी

Acidity

एसिडिटी वह व्याधि है जिसके साथ लोग वर्षों तक जीते हैं और उसे रोग मानते ही नहीं — बस एक गोली रख लेते हैं। शिविर में इसे पाचन की पहली चेतावनी माना जाता है, जिसे सुन लेना बाकी सब कुछ आसान कर देता है।

जलन क्यों होती है

आमाशय में अम्ल का बनना स्वाभाविक है — उसी से भोजन पचता है। कठिनाई तब होती है जब अम्ल तो बनता रहे और पचाने के लिए भोजन ठीक समय पर न आए, या इतना आ जाए कि तंत्र सँभाल न सके।

खाली पेट लंबे समय तक रहना, फिर एक साथ भारी भोजन, चाय-कॉफ़ी की अधिकता, देर रात का भोजन और तनाव — ये पाँच कारण शिविर में सबसे अधिक मिलते हैं।

अम्ल को दबाने वाली दवाएँ जलन रोक देती हैं, पर वह कारण नहीं हटातीं जिसने अम्ल का यह चक्र बनाया।

शिविर में क्या बदलता है

सबसे पहले भोजन का समय। शिविर में भोजन एक निश्चित घड़ी पर आता है, और शरीर को कुछ ही दिनों में उस लय की आदत पड़ जाती है। बहुत से लोगों में केवल इतने से ही अंतर दिखता है।

दूसरा, भोजन की प्रकृति — तला हुआ, अत्यधिक मसालेदार और खट्टा भोजन हटता है; उसकी जगह हल्का, कम मसाले वाला सात्विक भोजन आता है।

तीसरा, रात्रि भोजन का समय। सूर्यास्त के निकट किया गया हल्का भोजन लेटने से पहले पचने का समय पा जाता है — रात की जलन का यह सबसे सीधा उत्तर है।

आहार के मूल नियम

  • कभी लंबे समय तक खाली पेट न रहें
  • भोजन धीरे और चबाकर — यह औषधि जितना ही महत्वपूर्ण है
  • चाय, कॉफ़ी और खाली पेट नींबू कम से कम
  • तला और अत्यधिक मसालेदार भोजन बाहर
  • रात्रि भोजन सोने से तीन घंटे पहले
  • भोजन के तुरंत बाद न लेटें

अनुभव

एसिडिटी के साथ आए लोगों के अनुभव

ये व्यक्तिगत अनुभव हैं। परिणाम हर व्यक्ति में भिन्न होते हैं।

  • बीस साल से जेब में गोली रखता था। रात का भोजन जल्दी करने भर से जो अंतर आया, उसकी मुझे कल्पना नहीं थी।
    महेन्द्र सिंगल४७ · बीकानेरव्यक्तिगत अनुभव — परिणाम भिन्न हो सकते हैं

शिविर कैलेंडर

आगामी शिविर

तिथि, नगर, स्थान और शेष स्थान — सब कुछ पहले से स्पष्ट। पोस्टर का इंतज़ार नहीं।

पूरा कैलेंडर देखें

आगामी शिविर

  • श्री गंगानगर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    स्थान भर रहे हैं१२ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    ४–११ अक्टूबर २०२६
    स्थान
    श्री माहेश्वरी भवन, श्री गंगानगर
    पंजीकरण करें
  • जयपुर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है९६ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    १–८ नवंबर २०२६
    स्थान
    सामुदायिक भवन, मालवीय नगर, जयपुर
    पंजीकरण करें
  • ऋषिकेश में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है४१ स्थान शेष

    आश्रम शिविर

    तिथि
    ६–१३ दिसंबर २०२६
    स्थान
    गंगा तट आश्रम, ऋषिकेश
    पंजीकरण करें
  • बीकानेर में आयोजित शिविर के प्रतिभागी
    पंजीकरण खुला है१०८ स्थान शेष

    शरीर की भागवत

    तिथि
    १०–१७ जनवरी २०२७
    स्थान
    अग्रसेन भवन, बीकानेर
    पंजीकरण करें

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शंका समाधान

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